हिमाचल की सुक्खू सरकार में असंतोष के सुर; कांग्रेस विधायकों की पोस्ट से सियासी बवंडर, हाईकमान से गुहार
सुक्खू सरकार के दो विधायकों राजेंद्र राणा और सुधीर शर्मा की पोस्ट पर बवाल मच गया है। पोस्ट ने जाहिर कर दिया है सरकार के भीतर असंतोष के स्वर पनप रहे हैं। मामले में हाईकमान से गुहार लगाई है।
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सुक्खू सरकार के दो विधायकों (राजेंद्र राणा और सुधीर शर्मा) की पोस्ट के बाद सियासत गरमा गई है। अब सरकार के वरिष्ठ मंत्री चंद्र कुमार ने हाईकमान से इस मामले को संज्ञान लेने की गुहार लगाई है। उन्होंने दोनों विधायकों को हिदायत दी कि यदि कुछ कहना है तो मुख्यमंत्री के दरवाजे खुले हैं। इस मामले में पूर्व सीपीएस नीरज भारती भी कूद पड़े हैं। उन्होंने मंत्री पद पर विराजमान अपने ही पिता चौधरी चंद्र कुमार को नसीहत देते हुए कहा कि कांग्रेस के चुने प्रतिनिधियों पर तंज कसने से अच्छा है कि आप अपने जिले पर फोकस करें। आप हिमाचल के सबसे बड़े जिले कांगड़ा के एकमात्र मंत्री हैं।
बता दें कि हमीरपुर जिला के समरपुर विधायक राजेंद्र राणा ने पोस्ट डाली थी। इस पर धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा ने कमेंट किया था। इससे हड़कंप मच गया। बवाल बढ़ता देख मंत्री चंद्र कुमार ने दोनों विधायकों को नसीहत दी और कहा कि यदि कोई शिकायत है तो मुख्यमंत्री के दरवाजे खुले हैं। बता दें कि सुजानपुर से कांग्रेस विधायक राजेंद्र राणा ने साल 2017 के विधानसभा चुनाव में दो बार सीएम रहे और भाजपा के तत्कालीन सीएम उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल को हराकर सनसनी मचा दी थी। इस बार दोबारा भाजपा उम्मीदवार को हराकर उनका सियासी रुतबा बढ़ गया है। सनद रहे राणा शुरू से मंत्री पद की दौड़ में शामिल नेता माने जाते रहे हैं।
इसी तरह पूर्व वीरभद्र सरकार में मंत्री रहे सुधीर शर्मा भी मंत्री पद के दावेदार माने जाते हैं। इन दोनों विधायकों की फेसबुक पोस्ट को मंत्री नहीं बनाए जाने की छटपटाहट के तौर पर देखा जा रहा है। राणा ने फेसबुक पोस्ट में महाभारत प्रसंग का जिक्र किया। उन्होंने लिखा- जो विवादों से दूर रहते हैं, वही दिलों पर राज करते हैं, जो विवादों में उलझ जाते हैं, वे दिलों से भी उतर जाते हैं। पांडवों ने सिर्फ पांच गांव मांगे थे। दुर्योधन ने सुई की नोक के बराबर भी जमीन देने से इनकार कर दिया था। एक जिद ने महाभारत रच दिया। सुकून भरी जिंदगी के लिए विवादों से दूरी, है बेहद जरूरी।
राणा की इसी पोस्ट पर मंत्री पद की दौड़ में शामिल विधायक सुधीर शर्मा ने कमेंट किया- समय बड़ा बलवान है, मनुज नहीं बलवान। भीलां लूटी गोपियां, वही अर्जुन वही बाण...
वहीं पूर्व सीपीएस नीरज भारती ने अपने मंत्री पिता चौधरी चंद्र कुमार को जिले पर फोकस करने की सलाह देते हुए सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा आठ महीने हो गए, अभी तक पुरानी सरकार के अधिकारी ही सेवाएं दे रहे हैं। ये अधिकारी कांग्रेस के कार्यकताओं को मुंह नहीं लगा रहे हैं। आलम यह है कि कांग्रेस को सता में लाने वालों की अनदेखी हो रही है। सत्ता परिवर्तन राजनीतिज्ञों का काम है जबकि व्यवस्था परिर्वतन सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों का... कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सत्ता बदली लेकिन अधिकारी अब भी पुरानी व्यवस्था वाले ही हैं जो विपक्ष के लोगों के साथ बैठ कर पार्टियां कर रहे हैं।
नीरज भारती ने अपने मंत्री पिता चौधरी चंद्र कुमार को नसीहत देते हुए आगे लिखा- ये अधिकारी विपक्षी नेताओं के कार्यों और उनकी बातों को तरहीज दे रहे हैं। यही वजह है कि सत्ता परिवर्तन करने वाले अधिकतर कार्यकर्ता और कुछ नेता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। कांग्रेसियों का यही हाल है जब विपक्ष में होते है तो सत्ता के लिए लड़ते हैं। कांग्रेस के कार्यकर्ता डंडे खाते हैं, धक्के खाते हैं, सिर फुटवाते हैं, अपने ऊपर केस डलवाते हैं। जैसे ही सत्ता मिलती है तो पार्टी के बड़े नेता भूल जाते है कि सत्ता कैसे मिली।जो अधिकारी और कर्मचारी विपक्ष में रहते आंखो को चुभते थे, सत्ता आते ही वो आंखो के तारे बन जाते हैं। कमाल की सत्ता है और सत्ता का व्यवस्था परिर्वतन...
वीरभद्र सिंह सरकार में सीपीएस रहे नीरज भारती ने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा- चौधरी चंद्र कुमार को कांग्रेस के चुने हुए विधायकों पर टिप्पणी करने की बजाय सूबे के सबसे बड़े जिले के अधिकारियों और कर्मचारियों के बारे में सोचना चाहिए जो 8 महीने पहले भी थे अब भी उन्हीं पदों पर जमे हुए हैं। आप कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बारे में सोचें जिन्हे ये अधिकारी मुंह नहीं लगा रहे हैं। उस विधायक पर भी नजर रखें जो आपका और मुख्यमंत्री सुक्खू खास होने का ढोंग रच रहे हैं। उस विधायक की इन अधिकारियों कर्मचारियों के साथ साठगांठ है।
आखिरकार कृषि मंत्री चौधरी चंद्र कुमार को सामने आना पड़ा। उन्होंने अपने बेटे की पोस्ट पर कहा कि मुख्यमंत्री का कोई खास विधायक नहीं होता है। सभी विधायक मुख्यमंत्री के खास होते हैं। प्रशासन को बदलने में वक्त लगता है। हर सरकार अपनी प्राथमिकता के साथ काम करती है। चौधरी चंद्र कुमार ने विधायक राजेंद्र राणा और सुधीर कुमार को भी नसीहत दी। उन्होंने कहा- मंत्रिमंडल में 3 सीटे खाली चल रही हैं। छोटा परिवार सुख का आधार होता है। स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की सरकार में भी मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ था। ऐसे में विधायकों को इंतजार करना चाहिए। पिछली सरकार में ओबीसी का कोई भी व्यक्ति मंत्रीमंडल में नहीं था लेकिन कांग्रेस सरकार में 2-2 मंत्री हैं।
